Wednesday, 17 August 2016

Rakhi

सावन के आते ही
बादलों के छा जाते ही
बहती स्नेह-धार है
उमड़ता ह्रदय में प्यार है I
मुस्कराती है राखियाँ
दुकानों में ,मेलों में I
दौडती है राखियाँ
यानों में रेलों में
लांघती हैं सीमाएँ
समुद्र के सीने को छूती
पहुँच जाती हैं ख़ुशी से
देशों से विदेशों तक
लेकर बहन का विश्वास
भाइयों के अहसासों तक I
बंधते हैं ये पावन धागे
प्रहरी से प्रधान  तक
व्यापारी से अधिकारी तक
निर्धन से धनवान तक I
खिलखिलाती है बहनें
भाइयों की कलाइयों पर
गर्वित हो उछलती है
मायके की उंचाईयों पर I
एक मुट्ठी प्यार के बदले
आंचल भर आशीष देती है  बहन I
धन्य है अखंड भारत
धन्य है ये पर्व और त्योहार
धन्य है रेशमी धागे में बंधा
भाई-बहन का अनंत प्यार I

रक्षा बंधन की हार्दिक शुभ कामनाएँ

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