हर वर्ष श्रावण पूर्णिमा से पूर्व ही
तेरी हाथों से स्नेह-स्पर्श पाकर
पहुँचती थी मेरे हाथों में राखी
मुझे पता है कि इस साल
नहीं आएगी तेरी राखी
चली गई हो तुम रूठकर
न जाने कहाँ ! न जाने किधर !
लेकिन मैं तुम्हें सपनों में देखता हूँ ,
और जब भी देखता हूँ ,
तुम्हें हँसते देखता हूँ ,
मुस्कुराते देखता हूँ,
खिलखिलाते देखता हूँ I
मुझे विश्वास है
