सुबह की पहली निमाज़ के साथ
ऊपर की तरफ़ उठाकर अपने हाथ
मांगती हूँ खुदा से यह दुआ
मेरे मौला,मेरे मालिक –मुझे इन्सान बना दे |
दे दी है मुझे ज़िंदगी, हर चीज़ है मयस्सर
तेरे ही आंचल में जियूं ऐसा एक जहां बना दे |
इतनी बड़ी ज़मीन नापने की हिमाकत क्या करूँ !
बसेरा है तेरा जहाँ मुझे वह आसमां बना दे |
तेरी कायनात का एक छोटा सा ज़र्रा हूँ मैं
हर ज़र्रा खिल उठें ऐसा बागबां बना दे |
तलवार की धार पर चलकर ज़ख़्मी हुई हूँ चलकर
इशारा तेरी मंजिल का मिलें ऐसे निशान बना दें |
इस्मत और किस्मत लुटने की जहाँ कुछ डर ना हो
इस बस्ती में कहीं ऐसा बियाँबान बना दे |
रंजिश की तलवार से रंगती है रोज़ राहें
मुस्कुराते हो गुल जहाँ ऐसा गुलिस्तान बना दे |
नफ़रत और फ़ितरत छोड़ चल पड़े तेरी जानिब
ऐसे नेक दिलों का एक कारवां बना दे |
जिंदगी किसी के काम आए, हाथ ख़िदमत में उठे
मेरे मालिक ऐसे लम्हे बे इंतिहा बना दें
मेरे मालिक मुझे इन्सान बना दे |
मेरे मौला मुझे इन्सान बना दे ||
ऊपर की तरफ़ उठाकर अपने हाथ
मांगती हूँ खुदा से यह दुआ
मेरे मौला,मेरे मालिक –मुझे इन्सान बना दे |
दे दी है मुझे ज़िंदगी, हर चीज़ है मयस्सर
तेरे ही आंचल में जियूं ऐसा एक जहां बना दे |
इतनी बड़ी ज़मीन नापने की हिमाकत क्या करूँ !
बसेरा है तेरा जहाँ मुझे वह आसमां बना दे |
तेरी कायनात का एक छोटा सा ज़र्रा हूँ मैं
हर ज़र्रा खिल उठें ऐसा बागबां बना दे |
तलवार की धार पर चलकर ज़ख़्मी हुई हूँ चलकर
इशारा तेरी मंजिल का मिलें ऐसे निशान बना दें |
इस्मत और किस्मत लुटने की जहाँ कुछ डर ना हो
इस बस्ती में कहीं ऐसा बियाँबान बना दे |
रंजिश की तलवार से रंगती है रोज़ राहें
मुस्कुराते हो गुल जहाँ ऐसा गुलिस्तान बना दे |
नफ़रत और फ़ितरत छोड़ चल पड़े तेरी जानिब
ऐसे नेक दिलों का एक कारवां बना दे |
जिंदगी किसी के काम आए, हाथ ख़िदमत में उठे
मेरे मालिक ऐसे लम्हे बे इंतिहा बना दें
मेरे मालिक मुझे इन्सान बना दे |
मेरे मौला मुझे इन्सान बना दे ||
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